यही फैशन है..

गांवों की यही रवायत है। या तो ताश होगा या पंचायत। आजकल नया फैशन चौराहेबाज़ी का भी है। युवाओं को क्या चाहिए, एक कैनवास जूता जो रीबॉक या एडिडास का हो, एक रंगीन हुड वाली t शर्ट, एक जीन्स , एक मोटर साईकल और सवसे ज़रूरी एक और आवारा दोस्त।पुकार, राज दरबार, दिलबाग कॉन्फिडेंस दिलाते…

पुरानी गली से

कुछ गांव की धरती से। बुआ के बेटे की शादी में आया था। आलू की सेल्हियां,आंख निकलते पौधे, छोटा छोटा खोंट कर मीच कर तुरंत खा सकने वाला चना और उसका हल्का खट्टा और हर्राया सा स्वाद, खड़े -पड़े गन्ने के खेत, ईंटों के बने मकान बिना प्लास्टर, बिना किसी नफासत के बिस्तर, टेंट जो…

‘Vanchit’ first story from my book ‘dard manjta hai’

वंचित ऐसा पहली बार नहीं हो रहा था, पिछले 2-4 बर्षो में यह रीतापन उसे बार बार महसूस होने लगा था । अशोका होटल के बार में एक कोने में 4 दोस्त आज फिर बैठे थे, अंधेरी रोशनी तथा धुएं से सुगन्धित माहौल में। बार की नियति में अंधेरें में रहना ही है। रूक रूक…

Will power

इच्छा मृत्यु का वरदान भीष्म पितामह को प्राप्त था। परंतु गौर से देखिए और थोड़ा extrapolate करिए तो ये सबको प्राप्त है। ये बात सच है कि अगर चित्त प्रसन्न न हो, तो देह में अन्न नही लगता। यदि किसी मकान में लोग न रहते हों , तो वो बड़ी जल्दी ही गिर जाता है।…

Life is all about adjusting

आज मुझे एक साहब ने बताया कि ओ हेनरी ने अपने जीवन मे सब से अच्छी कहानियां तब लिखीं, जब वे 5 साल जेल में थे। सर्जनात्मकता पीस ऑफ माइंड और एकांत मांगती है, तो क्या इसके लिए जेल ही जाना पड़ेगा। चलते फिरते बिचार आया। फिर हमने ही काट दिया। बचपन मे एक बड़ी…

Me too campaign

#Metoo*campaign वैसे तो मैं इस मुद्दे पर कुछ कहना नही चाह रहा था। काफी लोगों ने इसको अभिजात्य कह कर मखौल भी उड़ाया, कुछ अभी भी ,तब नही तो अब क्यों? कह कर हंसी कर रहे हैं। पर ये ऐसा क्यों कर रहे हैं? वायरल हो जाना ज़रूर भेड़ चाल लगता है। क्या ये मीडिया…

साहित्य और पुस्तकों का भविष्य

कुछ दिनों पहले मैंने रेडियो में एक इंटरव्यू दिया था, जिसमे एक सवाल पूछा गया था कि इंटरनेट मोबाइल के युग मे साहित्य और पुस्तकों का भविष्य बचा ही कहां है। मैने पूर्ण आत्मविशास से कहा कि ये केवल ट्रांजीशन फेज है, ऐसा हमेशा रहेगा ये ज़रूरी नही। जिस तरह इलेक्ट्रॉनिक मीडिया आने से एक…

अहर्निश थी मेरी वो लेकिन….

अहर्निश थी मेरी वो, पर विदाई ज़रूरी थी, पीड़ा की गहराइयों से, अब रिहाई ज़रूरी थी। चेतना के हर पल क्षण में, सर्वव्याप्त रही वो, निशा में, तन्हाई में, ईश सी साक्षात रही वो, रीतियों, अनरीतियों, प्रतिष्ठा की जकड़न में, तुझको इस जन्म में हासिल न कर पाऊंगा पर अब इस दर्द के सागर से…

IPC 497

  #IPC497 What is significance of recent supreme court decision on abolition of IPC section 497? It’s being criticised for promoting adultery and disintegration of families? In essence, it is higher degree of liberation. It’s further extension of right of freedom and right of life.  It gives freedom of using your body organs in your…

एक कविता -अनिश्चय भरी मोहब्बत

मैं अकिंचन, मारा हूँ, तेरी द्रुत बदलती सम्वेदना का बहा हूँ भीषण प्रवाह में, कभी सूखी दरकती वसुंधरा सा सख्त, सर्द, निर्लिप्त बरफ सा जो परदा है एक स्पर्श और निमिष में, आइसक्रीम सा पिघला है निशा तक दर्प में उत्तुंग हिमालय की दीवार हो जाने किस प्रहर, पिघल फिर उमड़ते सागर का विस्तार हो…