Synopsis

वंचित: विनीत अपने दोस्तों से 20 साल बाद मिलता है और कई वर्षों बाद मानसी से भी। वही मानसी , जिसने उसको सीढ़ी की तरह उपयोग किया और उस से आगे निकल गयी। विनीत ने अपनी आजादी और मौज मस्ती के लिए अपने को सभी पारिवारिक जिम्मेदारियों और बंधनों से सदा ही अपने को मुक्त रखा ।आज जब समाज में वह मित्रों के साथ बैठा है तो उसने पाया कि उसके अपने लोग भी उसे छोड़ चुके हैं वह उसकी परवाह नहीं करते। ज़िन्दगी में अचानक निर्वात कैसे आता है, वह इस कहानी में चित्रित है।

मेरे भगवान: गरीब बंशीलाल को मास्टर साहब ने ऋण और योजना दी, जिससे बंसीलाल समृद्ध हुआ। गरीबी इंसान के मूल्य नही छीन सकती, जिस पर चढ़ कर वह पुनः स्थापित हो सकता है। यह बंसीलाल की महानता थी कि उसने ऋण को अपने भाग्य से जोड़कर देखा और अदा होने के बाद भी उस पर सदैव ब्याज देता रहा।

कागजी इंसाफ: रामनरेश एवं उसके साथियों को रेलवे में सरकारी कार्य में भयंकर नेगलिजेंस करने के लिए नौकरी से निकाल दिया गया था। 10 साल बाद मुकदमा लड़ कर जब वापस बहाली हुई तो सरकारी व्यवस्था ने ज्वाइन कराने में देर लगाई और वह बिना जॉइन किये ही मर गया। अब एक पेंच फंस कर रह गया, जिस से उसके परिवार की ज़िंदगी खत्म सी हो गयी।इस देश मे ऐसे ही कागज़ी इंसाफ मिलते हैं।

दर्द माँजता है : क्षितिज और उसके तीन दोस्त दिल्ली में रहकर सिविल सर्विसेज की तैयारी करते हैं ।1993 में जब लातूर में भूकंप आया तो इस स्थिति की भयावहता से विह्वल होकर सहायता के लिए वे वहां चले जाते हैं ।इस दर्द और विनाश के माहौल में एक प्यार और ज़िन्दगी पनपती है क्षितिज और वंदना के बीच में।

परिस्थितियां: जब किसी प्रियजन की मौत शाम को हो जाए तो दाह संस्कार के लिए अगला दिन होने का रात भर इंतजार करना पड़ता है फिर पूरी रात उसके परिजनों के लिए कैसे त्रासद हो जाती है । ऐसी ही दो परिस्थितियां हरिप्रसाद शर्मा ने झेलीं।

ट्रेन, बस और लड़की : इंजीनियरिंग कॉलेज के 3 दोस्त हैं उनमें से एक औसत लुक पर संजीदा दिल के लड़के को दो बार प्यार होता है। पहला प्यार कॉलेज में, और दूसरा उसके बाद। जब उसको लगने लगता है कि लड़की उससे पट गई है ,तभी उसको झटका मिलता है। दूसरा झटका रोमांचक है, जो एक खेल की तरह है। दोस्त समझा देते हैं कि ट्रेन, बस और लड़की के लिए परेशान नहीं होते ,एक जाती है तो दूसरी आती है।

छद्म: IAS पिता के रसूख से और बहुत अच्छी योजना के बदौलत एक विदेशी लड़की के बलात्कार का अभियुक्त किस तरह से इस देश मे एक छद्म नाम और पता पा लेता है। इतना ही नही , इस नए अवतार से वह सरकारी बैंक में अधिकारी की नौकरी की दहलीज तक पहुंच गया ।इंटरव्यू बोर्ड के चेयरमैन के मात्र शक की वजह से पूरा राज खुला।

राजकाज: सरकारी व्यवस्था में लापरवाही और अकर्मण्यता भरी हुई है ।इस अकर्मण्यता के कारण अक्सर ही आपात की स्थितियां पैदा की जाती है । इमरजेंसी भी पैसा कमाने का एक अवसर है। रेलवे के एक मंझे हुए अधिकारी न कैसेे आपात स्थिति पैदा की और उसमें से मलाई निकाली, यही राजकाज है इस देश का।ब्यूरोक्रेसी का फोकस केवल हुक्म की तुरंत फरमा बरदारी और चापलूसी तक रह गया है।

एक तेरा ही साथ : ताड़क देव एक निम्न औसत व्यक्ति है ।जो अपनी सरकारी नौकरी की बदौलत एक बहुत सुंदर लड़की का पति बन जाता है ।वह उसके प्रेम में पागल है नौकरी से बाहर जाने पर उसकी पत्नी किसी और के साथ एक होटल में पकड़ी जाती है । फिर घृणा और करुणा का खेल चलता है आखिर क्या जीतता है, वह एक तेरा ही साथ कि कहानी है।

प्रतिशोध : एक गांव में राम निवाज के खेत, राम सहाय द्वारा बहला-फुसलाकर कर्ज देकर कब्जा कर लिए गए। जमीन से बेदखल होने के बाद रामनिवाज लखनऊ में साढू के साइकिल की दुकान पर मजदूरी करने लगे । साढू की मदद से बेटे को पढ़ा लिखा कर कंपाउंडर बनाया। और वह गांव के ही अस्पताल में नियुक्त हो गया। सहाय को बुढ़ापे में TB हो गई, तो उसके बेटों ने घर से निकाल दिया। निवाज की सह्रदयता और सदाशयता थी कि उसने सहाय को गले लगाया और बेटे को उसका इलाज करने को कहा। जब वह लगभग ठीक हो गया तो प्रतिशोध क्यों और कैसे लिया?


दर्द जोड़ता है। सुख तोड़ता है , ईर्ष्या से । दर्द माँजता भी है, करुणा और संवेदना देता है। दर्द महान है, मानवीयता देता है।