• एक अनाम लघु उपन्यास

    तीन स्त्रियां देश के अलग-अलग क्षेत्रों से आती हैं। विभिन्न दिशाओं से आने वाली रेलगाड़ियों की तरह एक जंक्शन पर मिलती हैं ।इलाहाबाद संगम की नगरीे तीन नदियों की तरह ही तीन स्त्रियों को मिलाती है।
    30 से 40 वर्ष के बीच के आयु की मन्दालसा, पल्लवी और चांदनी वेल सेटल्ड हैं। फूल अलग-अलग होते हुए भी सब में सुगंध एक ही है ।जीवन की विषमताओं ,कुरूपताओं और कहीं पुरुषों से प्रताड़ित, वह अपनी बेड़ियां काटने के लिए प्रयासरत हैं। ऐसे प्रयास में ही एक दिन वे अपने आप को escape velocity से प्रक्षेपित करती हैं और फिर काफी दूर निकलने के बाद याद आता है जमीन तो पीछे छूट गई।

    इस यात्रा में आप शीघ्र ही शामिल होंगे ……


  • दर्द माँजता है

    इस संग्रह में लगभग समाज का हर चेहरा मौजूद है। ‘मेरे भगवान’ में सामाजिक मूल्यों का विकास है, वंशी लाल जैसा भोला चरित्र है, वहीं ‘छ्द्म’ में रंजीत दत्त के छल , खल की पराकाष्ठा है। लातूर भूकम्प के भयावह विभीषिका के दर्द के बीच मे विश्वास और प्रेम का नन्हा बीज उगता है, ‘दर्द माँजता है’ में, परन्तु ‘एक तेरा ही साथ’ मे नायक के विश्वास का हनन हो जाता है और ततपश्चात प्रेम की उदारता और उदात्त स्वरूप दिखता है। ‘वंचित’ का नायक अपने ऐश और मौज के लिए जो व्यूह रचता है, उस मे वो अपने को स्वयं फंसा हुआ पाता है।…..



दर्द जोड़ता है। सुख तोड़ता है , ईर्ष्या से । दर्द माँजता भी है, करुणा और संवेदना देता है। दर्द महान है, मानवीयता देता है।